सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन (S4) के नेतृत्व में- सामाजिक क्रांति की नई सुबह

                                                                        

                 सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन (S4) के नेतृत्व में-  सामाजिक क्रांति की नई सुबह

*ग्राम सकरेली (बाराद्वार) में सूर्यवंशी परिवार ने तोड़ीं रूढ़िवादिता की बेड़ियां; मृत्यु भोज और खर्चीली परंपराओं का किया पूर्ण बहिष्कार

*सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन (S4) के विचारों और सामाजिक चेतना के अभियान का गहरा प्रभाव अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। संगठन के मार्गदर्शन में सक्ति/जांजगीर-चांपा क्षेत्र के *ग्राम सकरेली (बाराद्वार)* में सूर्यवंशी परिवार ने समाज के समक्ष विचारशीलता, सादगी और बदलाव की एक अनूठी और ऐतिहासिक मिसाल कायम की है।

कुरीतियों और फिजूलखर्ची पर कड़ा प्रहार

*स्व. श्री गंगाराम सूर्यवंशी जी* के परिनिर्वाण के पश्चात उनके सुपुत्रों—*राजेश सूर्यवंशी, सुरेश कुमार, नरेश कुमार, रमेश सूर्यवंशी* एवं गुलशन कुमार सूर्यवंशी (समाज सुधारक)** ने शोक की इस घड़ी में सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी परंपराओं को श्रद्धांजली देने का साहसी निर्णय लिया।

परिवार ने पारंपरिक एवं खर्चीले कर्मकांडों जैसे *'दस नहावान', 'तीज नहावान', 'अंगराशन'* और *'बिस्सर जैसीकुरीतियों    पर पूरी तरह से रोक लगा दी। पारम्परिक मृत्यु भोज के स्थान पर केवल 7 दिनों के भीतर एक अत्यंत गरिमामय *'श्रद्धांजलि सभा'* का आयोजन कर पूजनीय पिता जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अनूठी श्रद्धांजलि सभा के 3 मुख्य संदेश

1. नशाबंदी पर कठोर रुख:- शोक कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों के सेवन व वितरण को पूर्णतः वर्जित रखा गया।

2. सादगी एवं मिष्ठान बहिष्कार:- समाज के नियमों के अनुरूप भोजन में किसी भी प्रकार के मीठे व्यंजन (खीर, बड़ा आदि) परोसने और बाहर से लाने पर सख्त प्रतिबंध रहा।

3. नारी शक्ति का सम्मान:- अंतिम संस्कार (मिट्टी समर्पण) से लेकर श्रद्धांजलि सभा तक महिलाओं को पुरुषों के समान बराबरी का अधिकार और विशिष्ट स्थान दिया गया।

प्रबुद्ध जनों एवं वक्ताओं का संदेश*               

कार्यक्रम में उपस्थित *मुख्य वक्ता पूज्य भंते रामाधार बौद्ध जी* ने तथागत बुद्ध एवं बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों पर प्रकाश डालते हुए परिवार के इस प्रगतिशील कदम की  प्रशंसा की 

 "जब सामान्य परिवार स्वयं आगे बढ़कर ऐसे साहसी कदम उठाते हैं,

  तो समाज से कुरीतियाँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं।"

 "समाज के संविधान का पालन करना ही वास्तविक उन्नति है। जब परिवार स्वयं आगे बढ़कर ऐसे साहसी कदम उठाते हैं, तो समाज से कुरीतियाँ स्वतः समाप्त हो जाती हैं।"

संगठन (S4) प्रतिनिधि/प्रबुद्ध जन*

कार्यक्रम में विशेष रूप से *महेश कुमार, मुरारी गढ़ेवाल, विजय लाठिया, परदेशी राम, राजेंद्र कुमार* (S4) की नारी शक्ति सहित और अनेक गणमान्य नागरिकों एवं अतिथियों ने उपस्थिति दर्ज कराई और परिवार के निर्णय की सराहना की। अनेको  ग्रामीणों की विशाल उपस्थिति में सभा का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज का वास्तविक उत्थान खोखले नारों से नहीं, बल्कि सूर्यवंशी परिवार जैसे दृढ़ और साहसी व्यवहारिक कदमों  ही संभव है।


                    मूल मंत्र:-  "हम सुधरेंगे, समाज सुधरेगा"

                                    संगठन (S4)

      (जांजगीर-चांपा, कोरबा, सक्ति, रायगढ़ परिक्षेत्र, छत्तीसगढ़)

 

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