सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: ग्राम खम्हिया में समाज सुधार की मिसाल, एक ही दिन में अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम संपन्न


सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: ग्राम खम्हिया में समाज सुधार की मिसाल
, एक ही दिन में अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम संपन्न

समाज में वास्तविक सुधार केवल विचारों और भाषणों से नहीं, बल्कि उन विचारों को अपने जीवन में अपनाने और व्यवहार में उतारने से आता है। जब कोई परिवार सामाजिक कुरीतियों को त्यागकर एक सकारात्मक पहल करता है, तो वह केवल अपने परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज के बदलाव का मार्ग प्रशस्त करता है।

ऐसी ही एक सराहनीय एवं प्रेरणादायक पहल ग्राम खम्हिया (झरना) निवासी डॉ. यशवंत सूर्यवंशी 'यश' एवं उनके परिवार द्वारा की गई

दुःख की घड़ी में लिया समाज सुधार का साहसिक निर्णय

ग्राम खम्हिया निवासी श्री ज्ञानदास सूर्यवंशी जी की माताजी, आदरणीय स्वर्गीय महेत्तरीन सूर्यवंशी, पत्नी स्वर्गीय झुरु सूर्यवंशी जी का दिनांक 31 अक्टूबर 2026 को आकस्मिक निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार उसी दिन शनिवार को पारंपरिक रीति से संपन्न हुआ।

इस दुःखद अवसर पर नाते-रिश्तेदारों एवं समाज के अनेक प्रतिष्ठित सदस्यों ने उपस्थित होकर दिवंगत माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन (S4) की ओर से,श्री राजेंद्र बौद्ध जी, श्री परदेसी ताम्रकर जी, श्री रंजीत कुमार लाठिया जी सहित संगठन के सदस्य उपस्थित रहे।

सभा को संबोधित करते हुए श्री राजेंद्र बौद्ध जी ने समाज में व्याप्त मृत्यु संस्कार संबंधी कुरीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कफन एवं अन्य सामग्री को सीमित रखने, मेवा-मिष्ठान्न तथा नशापान जैसी अनावश्यक परंपराओं को त्यागने और समाज के संविधान के अनुरूप सरल एवं सादगीपूर्ण संस्कार संपन्न कराने की अपील की।

इसी दौरान परिवार के सदस्य डॉ. यशवंत सूर्यवंशी 'यश' जी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनका परिवार सामाजिक कुरीतियों एवं अनावश्यक खर्चों से दूर रहते हुए अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रम एक ही दिन में संपन्न करेगा।

 एक ही दिन में संपन्न हुआ अंतिम संस्कार एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम

परिवार ने अपने निर्णय को केवल घोषणा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसी दिन अंतिम संस्कार के पश्चात श्रद्धांजलि सभा का आयोजन भी किया।

इस आयोजन में तीजकर्म, दसकर्म, कतारबद्ध तालाब स्नान, पगबंधिया, बिस्सर जैसी परंपरागत रस्मों को न करते हुए एक ही दिन में अंतिम संस्कार एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम संपन्न किया गया।

कार्यक्रम में समाज के सम्मानित सदस्यों श्री जी.डी. प्रधान जी, श्री भगाऊ राम रत्नाकर जी, श्री परशुराम लटियार जी, श्री सुखीराम पैगम्बर जी, श्री भागवत जी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने उपस्थित होकर दिवंगत माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

ग्राम हनुमंता के श्री श्यामलाल जी सहित अनेक अतिथियों ने परिवार की इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

कार्यक्रम के उपरांत उपस्थित अतिथियों के लिए सादे भोजन की व्यवस्था की गई। इसमें अनावश्यक मेवा-मिष्ठान्न एवं दिखावे से पूरी तरह परहेज किया गया।

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि किसी परिवार के प्रति सम्मान, संवेदना और श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए दिखावे, आडंबर और भारी खर्च की आवश्यकता नहीं होती।

 सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन ने की सराहना


सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन (S4) इस सकारात्मक एवं साहसिक पहल के लिए डॉ. यशवंत सूर्यवंशी 'यश' जी तथा उनके समस्त परिवार का हृदय से आभार एवं अभिनंदन करता है।

संगठन मानता है कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के लिए सबसे पहले हमें स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना होगा। केवल दूसरों को उपदेश देने से सामाजिक परिवर्तन नहीं आएगा। जब समाज के जागरूक, शिक्षित और जिम्मेदार परिवार स्वयं आगे आकर रूढ़िवादी परंपराओं को त्यागेंगे, तभी समाज में वास्तविक बदलाव संभव होगा।

डॉ. यशवंत जी के परिवार ने दुःख की घड़ी में भी सामाजिक सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। यह कदम निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

 आइए, समाज सुधार की इस पहल को जन आंदोलन बनाएं

हमारा प्रयास होना चाहिए कि मृत्यु संस्कार को सरल, सादगीपूर्ण, कम खर्चीला एवं सम्मानजनक बनाया जाए। अंधविश्वास, पाखंड, रूढ़िवादी परंपराओं और अनावश्यक फिजूलखर्ची को समाप्त करने के लिए सामूहिक रूप से आगे आएं।

किसी परिवार को मृत्यु के दुःख के साथ-साथ सामाजिक रस्मों के आर्थिक बोझ से भी न गुजरना पड़े। इसके लिए समाज को सकारात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए।

याद रखिए, मृत व्यक्ति के प्रति हमारा प्रेम और सम्मान रस्मों की संख्या से नहीं, बल्कि हमारे हृदय की संवेदनाओं से प्रकट होता है।

हार्दिक अभिनंदन एवं साधुवाद

सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन (S4) की ओर से डॉ. यशवंत सूर्यवंशी 'यश' जी, श्री ज्ञानदास सूर्यवंशी जी एवं उनके समस्त परिवार को इस अनुकरणीय सामाजिक पहल के लिए हार्दिक बधाई, साधुवाद एवं अभिनंदन।

आपके परिवार ने जो साहसिक कदम उठाया है, वह केवल एक परिवार का निर्णय नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला प्रेरणादायक उदाहरण है।

आइए, हम सब संकल्प लें कि सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए दिखावा नहीं करेंगे, अंधविश्वास और पाखंड को बढ़ावा नहीं देंगे तथा सामाजिक कुरीतियों के स्थान पर शिक्षा, वैज्ञानिक सोच, मानवता और सादगी को अपनाएंगे।

                     समाज बदलेगा तभी, जब हम स्वयं बदलने का साहस करेंगे।


                         अंतिम संकल्प -  "हम सुधरेंगे, समाज सुधरेगा 

                                                               संगठन(S4)छत्तीसगढ़

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